अटूट आस्था और ईश्वरीय संकल्प की गाथा
पूर्वी भारत के हृदय स्थल, कोलकाता के ऐतिहासिक आलमबाजार (दक्षिणेश्वर के समीप) में स्थित श्रीश्याम मंदिर आज केवल एक संरचना नहीं, बल्कि लाखों भक्तों के अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर उस ईश्वरीय चमत्कार का साक्ष्य है, जहाँ बाबा श्याम ने स्वयं अपनी सेवा के लिए अपने भक्तों को चुना और एक बंजर भूमि को 'पावन खाटूधाम' में परिवर्तित कर दिया।
दैवीय प्रेरणा और स्थापना का संकल्प
इस भव्य मंदिर की नींव में गोविंद मुरारी अग्रवाल जी का अनन्य समर्पण और बाबा के प्रति उनकी बचपन की अटूट श्रद्धा निहित है। बाबा श्याम ने स्वयं गोविंद जी के हृदय में इस स्थान पर विराजमान होने की इच्छा जागृत की। जिस भूमि पर आज यह भव्य दरबार सजा है, वह वर्षों तक अनुपयोगी और कानूनी विवादों से घिरी थी।
असंभव को संभव करते हुए, संस्था के अध्यक्ष श्री भैरवदत्त खेतान और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर वर्ष 2008 (अक्षय तृतीया) को इस पावन भूमि का अधिग्रहण किया गया। बाबा का चमत्कार ही था कि मात्र एक महीने के भीतर सभी सांसारिक बाधाएं दूर हो गईं और निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
निर्माण यात्रा: खाटू से आलमबाजार तक
मंदिर के निर्माण में आध्यात्मिक और शिल्प कला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है:
भूमि पूजन: 16 मई 2010 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नींव रखी गई।
खाटू की मिट्टी: मंदिर की दिव्यता को प्रगाढ़ करने के लिए राजस्थान के खाटूधाम की पवित्र रज (मिट्टी) लाकर इसकी नींव में मिलाई गई।
शिल्प कला: श्री गणेश अग्रवाल जी की देखरेख में जयपुर के कुशल कारीगरों द्वारा मकराना मार्बल और नक्काशीदार काँच का बारीकी से काम किया गया।
प्राण प्रतिष्ठा: 30 जनवरी 2020 (बसंत पंचमी) के ऐतिहासिक दिन पर बाबा श्याम के अलौकिक विग्रह को प्रथम तल पर भव्य रूप से स्थापित किया गया।
मंदिर की अलौकिक विशेषताएं
द्वि-स्वरूप विग्रह: यहाँ बाबा श्याम के मुखमंडल की यह विशेषता है कि भक्तों को एक ही स्वरूप में दो दर्शन प्राप्त होते हैं—एक ओर खाटू नरेश और दूसरी ओर भगवान श्री कृष्ण की मोहक छवि।
रजत गर्भगृह: बाबा का मुख्य गर्भगृह शुद्ध चांदी की कलाकृतियों से सुसज्जित है, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगाता है।
पंचायतन स्वरूप: मुख्य विग्रह के साथ यहाँ श्री राधा-कृष्ण, हनुमान जी, शिव परिवार और श्रीदेव के विग्रह भी विराजमान हैं।
भक्तों की सुविधा: बुजुर्ग और दिव्यांग भक्तों के लिए मंदिर में आधुनिक लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है।
सेवा और संस्कार का केंद्र
आलमबाजार श्री श्याम ध्वजा मंडल संस्था के तत्वावधान में यहाँ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा भी की जाती है।
नियमित संकीर्तन: प्रत्येक एकादशी को भव्य कीर्तन और द्वादशी को अखंड सेवा।
समाज सेवा: रक्तदान शिविर, वस्त्र वितरण, नेत्र परीक्षण और प्रतिदिन असहाय लोगों को भोजन वितरण जैसे प्रकल्प निरंतर जारी हैं।
क्षेत्र का विकास: मंदिर की स्थापना के बाद से इस अंचल में बुनियादी सुविधाओं जैसे मेट्रो, सड़क मार्ग और परिवहन का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।
सेवादारों की विरासत
मंदिर की इस यात्रा में स्वर्गीय राजा अग्रवाल जी की भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता, जिन्होंने अपने भजनों और व्यवहार से हज़ारों भक्तों को बाबा से जोड़ा। आज यह मंदिर प्रियाशरण जी महाराज के आध्यात्मिक मार्गदर्शन और श्री सीताराम जी अग्रवाल जैसे समर्पित ट्रस्टियों के नेतृत्व में अपनी महिमा का प्रसार कर रहा है।
